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शीर्षक
Text copied to clipboard!निगरानी एवं मूल्यांकन समन्वयक
विवरण
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हम एक ऐसे निगरानी एवं मूल्यांकन समन्वयक की तलाश कर रहे हैं जो कार्यक्रमों, परियोजनाओं और सामाजिक पहलों की प्रगति, गुणवत्ता, प्रभावशीलता और परिणामों का व्यवस्थित आकलन कर सके। यह भूमिका विशेष रूप से उन संगठनों के लिए महत्वपूर्ण है जो साक्ष्य-आधारित निर्णय, पारदर्शिता, जवाबदेही और निरंतर सुधार को प्राथमिकता देते हैं। निगरानी एवं मूल्यांकन समन्वयक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजनाओं के लक्ष्य स्पष्ट रूप से परिभाषित हों, उनके प्रदर्शन को मापने के लिए उपयुक्त संकेतक विकसित किए जाएं, और समय-समय पर विश्वसनीय डेटा एकत्र, विश्लेषित और प्रस्तुत किया जाए।
इस पद पर कार्यरत व्यक्ति कार्यक्रम टीमों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधन, दाताओं और बाहरी हितधारकों के साथ निकट समन्वय में काम करेगा। उसे परियोजना के आरंभ से लेकर समापन तक निगरानी ढांचे का विकास, डेटा संग्रहण प्रणालियों की स्थापना, गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं का पालन, और मूल्यांकन रिपोर्टों की तैयारी में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह भूमिका केवल डेटा संकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा से सार्थक निष्कर्ष निकालकर कार्यक्रम सुधार के लिए व्यावहारिक सुझाव देना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निगरानी एवं मूल्यांकन समन्वयक को तार्किक रूपरेखा, परिणाम-आधारित प्रबंधन, प्रदर्शन संकेतकों, आधाररेखा अध्ययन, मध्यावधि समीक्षा, अंतिम मूल्यांकन और प्रभाव आकलन जैसी अवधारणाओं की गहरी समझ होनी चाहिए। उसे मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों प्रकार के डेटा के साथ काम करने में दक्ष होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, डेटा की शुद्धता, समयबद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सत्यापन, फील्ड विज़िट, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करना भी इस भूमिका का हिस्सा है।
इस पद के लिए ऐसे उम्मीदवार की आवश्यकता है जो विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता, उत्कृष्ट संचार कौशल और रिपोर्ट लेखन में दक्ष हो। उसे विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी को व्यवस्थित करके स्पष्ट, संक्षिप्त और उपयोगी रिपोर्टों, डैशबोर्डों और प्रस्तुतियों में बदलने की क्षमता होनी चाहिए। यदि आप सामाजिक विकास, गैर-लाभकारी कार्यक्रमों, सार्वजनिक सेवा परियोजनाओं या बहु-हितधारक पहलों में मापन और सीखने की संस्कृति को मजबूत करने के प्रति उत्साही हैं, तो यह भूमिका आपके लिए उपयुक्त हो सकती है।
सफल उम्मीदवार संगठन की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणालियों को मजबूत करेगा, टीमों की क्षमता निर्माण में योगदान देगा, और यह सुनिश्चित करेगा कि कार्यक्रमों से प्राप्त सीख भविष्य की योजना और निर्णय-निर्माण में प्रभावी रूप से उपयोग हो। यह पद उन पेशेवरों के लिए आदर्श है जो डेटा को प्रभाव में बदलने, जवाबदेही को मजबूत करने और कार्यक्रमों की वास्तविक उपयोगिता को प्रमाणित करने में रुचि रखते हैं।
जिम्मेदारियां
Text copied to clipboard!- परियोजनाओं के लिए निगरानी एवं मूल्यांकन ढांचा विकसित और लागू करना।
- प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों, परिणामों और प्रभाव मापदंडों को परिभाषित करना।
- डेटा संग्रहण, सत्यापन, विश्लेषण और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं का समन्वय करना।
- फील्ड टीमों को डेटा गुणवत्ता, उपकरणों और रिपोर्टिंग मानकों पर प्रशिक्षण देना।
- मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक प्रगति रिपोर्ट तैयार करना।
- आधाररेखा, मध्यावधि और अंतिम मूल्यांकन गतिविधियों का प्रबंधन करना।
- डैशबोर्ड, सारांश और प्रस्तुतियों के माध्यम से निष्कर्ष साझा करना।
- दाताओं और प्रबंधन के लिए साक्ष्य-आधारित अनुशंसाएँ तैयार करना।
आवश्यकताएँ
Text copied to clipboard!- सामाजिक विज्ञान, सांख्यिकी, विकास अध्ययन, लोक स्वास्थ्य या संबंधित क्षेत्र में स्नातक या परास्नातक डिग्री।
- निगरानी एवं मूल्यांकन, शोध या कार्यक्रम प्रबंधन में प्रासंगिक अनुभव।
- मात्रात्मक और गुणात्मक डेटा विश्लेषण की मजबूत समझ।
- एक्सेल, डेटा प्रबंधन उपकरणों और रिपोर्टिंग प्रणालियों का अच्छा ज्ञान।
- रिपोर्ट लेखन और प्रस्तुति कौशल में दक्षता।
- विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय और संचार करने की क्षमता।
- डेटा गुणवत्ता आश्वासन और सत्यापन प्रक्रियाओं का अनुभव।
- हिंदी में उत्कृष्ट कार्यकुशलता तथा अंग्रेज़ी की कार्यात्मक समझ।
संभावित साक्षात्कार प्रश्न
Text copied to clipboard!- क्या आपके पास निगरानी एवं मूल्यांकन में पूर्व अनुभव है?
- आपने किन प्रकार की परियोजनाओं के लिए प्रदर्शन संकेतक विकसित किए हैं?
- क्या आप डेटा विश्लेषण के लिए किसी विशेष सॉफ्टवेयर या उपकरण का उपयोग करते हैं?
- आप डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कौन-सी प्रक्रियाएँ अपनाते हैं?
- क्या आपने आधाररेखा या अंतिम मूल्यांकन अध्ययन का समन्वय किया है?
- आप कार्यक्रम टीमों को निष्कर्षों के आधार पर सुधार हेतु कैसे मार्गदर्शन देते हैं?